साँस चलती है तुझेचलना पड़ेगा ही मुसाफिर!
चल रहा है तारकों कादल गगन में गीत गाताचल रहा आकाश भी हैशून्य में भ्रमता-भ्रमाता
पाँव के नीचे पड़ीअचला नहीं, यह चंचला है
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