जब मै छोटा था, सायद दुनिया बहुत बड़ी हुआ करती थी
मुचे याद है श्कूल से घर तक का रास्ता क्या क्या नही था वहा पे चाट की दुकाने जलेबी ki दुकाने
लेकिन aaj वहा पे फ़ोन शॉप , इंटरनेट kaife आदि है phir भी सब सूना है
सायद दुनिया अब सिमट rhi है
जब मै छोटा tha सामे बहुत लम्बी हुआ करती थी
शाम में क्रिक्केट खेलना घंटो तक पतंगबाजी करना, खो खो खेलना और थक के चूर हो जाना
अब शाम नही होती दिन ढल जाता है और रात हो जाती है
सायद वक्त अब सिमट रही है
जब मै छोटा था सायद दोस्ती बहुत गहरी हुआ करती थी
दिन भर वो हुजूम बना के खेलना साथ साथ रोना साथ साथ हसना लडकियों की बाते करना
अब भी मेरे कई दोस्त है बस फोर्मल ही हेल्लो होता है और अपने रस्ते चल देते है
सायद रिश्ते बदल रहे है
जब मै छोटा था सायद खेल भी अजीब हुआ करते थे
लुका छुपी, खो खो , लाछिक दान , टिप्पी टिप्पी टॉप
अब इन्टरनेट, ऑफिस, फिल्म्स से छूती नही मिलती
सायद जिन्दगी बदल रही है
जिन्दगी का सबसे बड़ा सच यही है जो कब्रिस्तान के बाहर अक्सर बोर्ड पे लिखा मिलता hai
मंजिल तो यही थी बस जिन्दगी गुजर गयी यह आते जाते
सायद समय बदल रहा है




