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Even if I don't reach all my goals, I've gone higher than I would have if I hadn't set any.

Saturday, September 25, 2010

सायद जिन्दगी बदल रही है

जब मै छोटा था, सायद दुनिया बहुत बड़ी हुआ करती थी

मुचे याद है श्कूल से घर तक का रास्ता क्या क्या नही था वहा पे चाट की दुकाने जलेबी ki दुकाने

लेकिन aaj वहा पे फ़ोन शॉप , इंटरनेट kaife आदि है phir भी सब सूना है

सायद दुनिया अब सिमट rhi है

जब मै छोटा tha सामे बहुत लम्बी हुआ करती थी

शाम में क्रिक्केट खेलना घंटो तक पतंगबाजी करना, खो खो खेलना और थक के चूर हो जाना

अब शाम नही होती दिन ढल जाता है और रात हो जाती है

सायद वक्त अब सिमट रही है

जब मै छोटा था सायद दोस्ती बहुत गहरी हुआ करती थी

दिन भर वो हुजूम बना के खेलना साथ साथ रोना साथ साथ हसना लडकियों की बाते करना

अब भी मेरे कई दोस्त है बस फोर्मल ही हेल्लो होता है और अपने रस्ते चल देते है

सायद रिश्ते बदल रहे है

जब मै छोटा था सायद खेल भी अजीब हुआ करते थे

लुका छुपी, खो खो , लाछिक दान , टिप्पी टिप्पी टॉप

अब इन्टरनेट, ऑफिस, फिल्म्स से छूती नही मिलती

सायद जिन्दगी बदल रही है

जिन्दगी का सबसे बड़ा सच यही है जो कब्रिस्तान के बाहर अक्सर बोर्ड पे लिखा मिलता hai

मंजिल तो यही थी बस जिन्दगी गुजर गयी यह आते जाते

सायद समय बदल रहा है

Friday, September 24, 2010

तन्हाई - एक अच्छा दोस्त

मै इस कदर थक गया हू
मै अपनी जिन्दगी से भागना चाहता हू
दूर इतना दूर मै जाना चाहता हू
की कोई देख न ले मुझको
मै तन्हाई से डरता था
लेकिन तन्हाई को अपना दोस्त बनाना चाहता हू
मैंने दोस्त बनाये इंसानों को
कोई समाच न सका मुझे
मै तन्हाई को ये सब समझाना चाहता हू
सायद तन्हाई मेरे बातो को समझ सके
मै यही सब उसे बताना चाहता हू
शहर की इस भागती दौड़ती जिन्दगी
में मै खो सा गया था
मै अब तन्हा अकेला रहना चाहता हू
लोग कहते है तन्हा अकेला नही जिया जा सकता
लेकिन मै उन्हें ये दिखला देना चाहता हू
दोस्त एक एसा हो जो साथ दे हमेशा
कभी अलग न हो मुझसे
इसलिए मै तन्हाई को दोस्त बनाना चाहता हू
इस स्वार्थी दुनिया ने दोस्ती तक को नही छोड़ा
इसलिए मै दुनियावालो से दूर जाना चाहता हू
लोग कहते है दोस्ती सबसे बड़ा रिश्ता होता है
फिर लोग इस पे शक क्यों करते है
इसलिए मै लोगो से दूर जाना चाहता हू
अकेला हू और अकेला रहना चाहता हू
लोग न मुचे समझ सके और न मै शायद लोगो को
और मै ये सब तन्हाई को बताना चाहता हू
अभागा था अभागा हू और सायद अभागा रहूँगा
मै इस अभागेपन से दूर भागना चाहता हू
तन्हाई की न कोई सूरत है न कोई सीरत
फिर कोई kaise chura payega muchse
sayad esliye bhi mai tnhai ko apna dost banana chahta hu
akela hu aur akela rhna chata hu

Thursday, September 2, 2010

सुबह का नमस्कार सभी को