
नई दिल्ली। संघ के आशीर्वाद से भाजपा अध्यक्ष बने नितिन गडकरी द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने योग्य बताए जाने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी संकेत दिया है कि आगामी आम चुनाव में मोदी भाजपा की ओर से शीर्ष कार्यकारी पद के उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा नरेंद्र मोदी को चक्रव्यूह में फंसाने की बरसों की नाकाम कोशिशों के बाद स्वयं उसमें बुरी तरह फंस गई हैं। अब उन्हें यह डर सताने लगा है कि अगले लोकसभा चुनाव में मोदी कहीं प्रधानमंत्री पद के लिए 'उनके वंश के प्रतिस्पर्धी' बन कर सामने न आ जाएं।
संघ ने कहा है कि मोदी को देश के भावी प्रधानमंत्री के सशक्त उम्मीदवार के रूप में उभरता देख 'सोनिया मंडली' भयाक्रांत है। पिछले कुछ लोकसभा चुनाव और गुजरात विधानसभा चुनावों में सोनिया और राहुल गांधी, मोदी के करिश्मे का जलवा देख चुके हैं और उसका परिणाम भी भुगत चुके हैं। ऐसे में मोदी की छवि-ध्वंस और चरित्र हनन उनकी पहली आवश्यकता बन गई है। संघ के मुखपत्र 'पांचजन्य' में आरोप लगाया गया है कि सोनिया मंडली की मदद से राजनीति के इस चक्रव्यूह में मोदी को फंसाने में उनके 'सात महारथी' पिछले सात साल से जुटे हुए हैं। लेकिन इन महारथियों को असफलता के सिवा कुछ हासिल नहीं हुआ।
इन सात महारथियों में तीस्ता सीतलवाड़ का जिक्र करते हुए कहा गया है कि सीतलवाड़ की आड़ में वह जावेद नाम छिपा रही है, जो उसके नाम से जुड़ा है। अन्य नामों में शबनम हाशमी, अहमद पटेल, फादर सड्रिक प्रकाश आदि को गिनाया गया है। लेख में कहा गया है, इस षड्यंत्रकारी राजनीति के चक्रव्यूह का एकमात्र लक्ष्य है मोदी पर राक्षसी छवि थोप, उन्हें अकेले घेरकर द्वापर के अभिमन्यु की गति प्राप्त कराना। किन्तु यह अभिमन्यु हर बार चक्रव्यूह को भेदकर बाहर निकल आता है और षड्यंत्रकारी नई व्यूह रचना की खोज में लग जाते हैं।
गुजरात दंगों के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल [एसआईटी] द्वारा मोदी को तलब किए जाने पर गडकरी ने कहा था कि मोदी प्रधानमंत्री बनने के योग्य हैं और वह इन सब संकट से उबर आएंगे।
संघ ने भी ऐसे विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि मोदी ने एसआईटी के रूप में बनाए गए चक्रव्यूह को तोड़ दिया है। संघ और भाजपा की ओर से मोदी को अगले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की धीरे धीरे चल रही इन तैयारियों के बीच शिवसेना को छोड़कर भाजपा के अन्य सहयोगी दल मोदी को लेकर सहज नहीं हैं।
राजग के प्रमुख घटक दल जद यू के नेता शरद यादव सहित बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मोदी को दूर रखने का बहुत साफ बयान देते आए हैं। नीतीश ने अभी कल ही फिर दोहराया कि बिहार विधानसभा के लिए इस साल के अंत में होने जा रहे चुनाव में प्रचार की खातिर मोदी को आने की कोई जरूरत नहीं है।

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