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Even if I don't reach all my goals, I've gone higher than I would have if I hadn't set any.

Sunday, April 11, 2010

Poem in Hindi

बहुत आवेग था भरा भीतर
चेहरे पर मात्र कुछ लकीर
प्राण रक्षा की याचना करते
हो चुका था एक अकीर
पौरुष से राज करनेवाला कर्मवादी
आज देख रहा था तकदीर

एक शून्यता भविष्य के प्रति
सब कुछ लगता दूसरे के हाथ में
हिम्मत हारने की कायरता कतई नहीं
चमत्कार का विश्वास था साथ में
पालनकर्ता दुष्ट का विनाश करेंगे
अपने कर्त्तव्य पथ पर चलने के आर्ह में

मेघ के ताण्डव से त्रस्त प्रकृति
अवतार की रात्री थी बहुत काली
अष्टम सन्तान की प्रतीक्षा् करता
व्यग्र हृदय था बहुत भारी
तूफान के कोलाहल के बीच आखिर
गून्जा बाल कृष्ण की मायावी किलकारी

-ज्योति (यू० के०)

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